Thursday, January 10, 2013

प्रधान मंत्री जी सैनिक पेड़ो पर नही लगते जागो पाकिस्तान को जबाव दो।

शहीद हेमराज की शहीदी पर मैं ज्ञानेश कुमार उस अमर शहीद को हिन्दु समाज के साथ अश्रुपूरित श्रद्धाञ्जलि देता हूँ और इस कपोत राज सरकार से कहता हूँ कि 
   केवल पग्गड़ बाँधने से कोई सरदार नही होता
                      प्रधान मंत्री बन जाता है पर वह प्रधान नही होता 
   मनमोहन है नाम तुम्हारा आँखों पर पट्टी मत बाँधो
                      भारत माँ घायल है उस पर और घाव अब मत लादो
   मनमोहन है नाम नही केवल शारीरिक मिटटी का
                       गांधारी की तरह सदा आंखों पर बांधी पटटी का।
   गांधारी औरत थी उसकी यह पीड़ा भी कम न थी 
                      वह फिर भी वीरांगनाओं में गिनती रखती थी
   सौ पुत्रों को जन्म दिया और सौओं निकले आतंकी 
                     उस माँ की हिम्मत भी दैखो जिसने सबकी मौत चखी ।
  मनमोहन जी कुछ समझो और असली सिख्खी दिखलाओ
                     अपनी माताजी को भी अब सम्मान जरा तुम मिलवाओ।
  क्यूं भारत माँ का दामन दुःखो से भर बाया है 
                     इटली की बेटी के आगे माँ का शीश झुकाया है।
  1500 वर्षों से हमसे जिस दानव ने खेला है 
                     गुरु गोविन्द व तेग बहादुर ने जिसको झेला है।
  बन्दा व बैरागी को भी कभी तो याद किया होता
                     तो भारत माँता का सीना एसे छलनी ना होता
  तुमने अपना शिर रख दीना भ्रष्ट पार्टी खाने में 

                     भारत की जनता को लूटा जिसने जीने में मर जाने में 
  भारत की आजादी को हिन्दु ने बलिदान किया 
                     सिख्खों ने ताकत दी उसको हिन्दु को बलबान किया 
  शहीद भगत सिंह और लालपत लाला पर मेरी आंखे रोती है
                             जिनको मिटा मिटा कर ये सरकारें खुश होतीं है।

   जिसने वीरों की समाधि को पैरों से रुदवाया है
                     भारत के वीरों की वाणी को अंगूठा दिखलाया है।
   वीर शिवा और महाराणा जिन्हैं चोर दिखाई देते हैं
                     टीपू , तुगलक बाबर जिनको गुणवान दिखाई देते है
   जिनको दया नही आती है हिन्दु के मर जाने पर 

                             वे ही रोते देखे हैं आतंकी के मर जाने पर 
   जो सैनिक के मर जाने पर छोटी वातें कह सकते हैं
                        पाकिस्तानी आतंकी को 'जी' उद्वोधन कर सकते हैं।
   औरंगजैव और टीपू जिनको महान दिखाई देते हैं 
                            अकबर और अलाउद्दीन महान दिखाई देते हैं
   वहिन वेटियों की इज्जत को जिन्हौने नीलाम किया 
                       मन्दिर तोड़ तोड़ कर जिनने भारत को गुमनाम किया
राजाओं के महल जिन्हौने कब्जे करके अपना नाम दिया 
                       वास्तुकला की शैली कहकर सरकारों ने सम्मान दिया 
   इन्हीं कुकर्मों को सरकार दिखाऐं जाती है 
                        मन्दिर तोड़क दुष्टों को महान बताऐ जाती है
   भारत पर जजिया कर लादा हिन्दु को बरबाद किया
                            दूजे ने भारत में आकर 3शदी तक राज किया 
   इस्लाम का बचा खुचा लेकर हमको बरबाद किया 
                            ज्यों पहले से ही मृत शरीर से कपड़ा भी उतार लिया
   सेवा सेवा की बाते कहकर जिसने गरीब भी लूट लिये
                           विरोध किया पेड़ो से लटका नीचे से फूँक दिये ।
   भारत के हिन्दु हिन्दु को जात पाँत में बाँट दिया 
                    वनबासी को आदिबासी बता बता भारत को बदनाम किया 
                     सेवा करने के नाम जहाँ पर एस्प्रिन बाँटी जाती है
    हिन्दु धर्म से दूर हटाने की तिकड़म अपनायी जाती हैं
                     भारत को नये नये प्रान्तों में बाँटने की साजिस की जाती है
    उन ईसाई और मुसल्मा का भारतीय संसाधन पर 
                      मनमोहन जी तुमने ही कल पहला हक बतलाया है।  

मथुरा | बुधवार सुबह जब सूरज ने आंखें खोलीं तो कोसीकलां के लोगों के लिए इतिहास बदल चुका था। दूरदराज में बसे गांव खैरार के एक घर का बेटा पूरे देश का सपूत बन गया था। वह भी महज तीस साल की उम्र में। हेमराज से हर कोई अपना रिश्ता जोड़ना चाह रहा था। खैरार ही नहीं आसपास के गांवों के लोग भी यह बताना नहीं भूल रहे थे कि पिछली बार छुट्टी पर आए हेमराज ने उनसे क्या कहा था। कोई हेमराज का छुटपन याद कर रहा था तो कोई उनका विद्यार्थी जीवन। कोई सेना की वर्दी में सजे उनके व्यक्तित्व को जेहन में टटोल रहा था तो कोई उनके बांकेपन पर फिदा था। जितने मुंह-उतनी बातें। सच ही कहा गया है, शहादत होती ही है इतनी गौरवशाली कि जीते-जी लोग उसकी कल्पना से रोमांचित हो उठते हैं। अपनी धरती पर आए दुश्मन से दो-दो हाथ करते हुए शहीद हुए लांसनायक हेमराज की खबर जिसने सुनी, उसके पांव उनके घर की ओर मुड़ गए। वीरगति पाए योद्धा के दर को सलाम करने के लिए मेला लग गया। गांव की हद छोटी पड़ गई, जनसैलाब उसके बाहर तक हिलोरे ले रहा था। सायंकाल शहीद का शव आने तक लोगों का हुजूम डटा रहा। मौके पर मौजूद डीएम समीर वर्मा और एसएसपी प्रदीप कुमार ने गांव के बुजुर्गो से बात करके शव पेटिका को खुलने नहीं दिया। माना जा रहा है कि शहीद के छत-विक्षत शव को देखकर भावनाएं न भड़कें, इसलिए प्रशासन ने यह कदम उठाया। इससे पहले सुबह आई बेटे की शहादत की खबर ने कुछ देर के लिए मां मीना देवी को भाव विह्वल किया, लेकिन उसके बाद साथ की महिलाओं के साथ वह बहू धर्मवती को संभालने में लग गईं। शहीद की पत्‍‌नी की हालत ने मौके पर मौजूद सभी की आंखों को नम कर दिया। हेमराज को सेना में जाने का शौक ऐसे ही नहीं चढ़ा। इसका कारण उनका फौजी परिवार में पला-बढ़ा होना था। प्रेरणास्त्रोत बने सेना में नौकरी कर चुके उनके दो चाचा। ऐसे में हेमराज भी बहादुरी दिखाने को सन 2001 में सेना में भर्ती हो गए। मृदुभाषी और सौम्य व्यवहार के धनी हेमराज को हथियारों से बेहद प्यार था।
          अभी मैच जीते तुम्हैं बहुत समय नही बीता है बहुत खेल लिए क्रिकेट अगर खेल का भूत उतर गया हो तो सीमा पार से भारतीय सैनिकों के साथ हो रहै खेल का भी होश कर लो और जबाव दो पाकिस्तान को वैसे तुमसे उम्मीद करना ही व्यर्थ है क्योकि तुम तो एक लूलू प्रधान मंत्री हो जो कि अपने आप बैठ भी नही सकते और खड़े भी नही हो सकते।खैर अपनी सोनिया जी से कुछ बता ही दो कि बाद में भारत को बरबाद कर लेना अभी तो पाकिस्तान के खिलाफ जंग लड़ लो।क्योंकि अगर जंग जीत गये तो जंग जीत सिंह कहला जाऔगे और भारत की यह निरीह व बेबकूफ जनता आपको मनमोहन सिंह की जगह जंगजीत सिंह कहने लगेगी और फिर भारत लूटो अभियान में भारत की माता श्री मती सोनिया गाँधी जी की हसरते जल्दी ही पूरी हो सकेगी।क्योकिं बेवकूफ भारतीय दोबारा बैबकूफ बन ही जाऐंगे वैसे भी अभी विपक्ष का मैराथन कम नही हुआ है।इन्हैं मैराथन करने दो जब तक जंग जीत कर जंग जीत बन जाओं कुछ इज्जत जनता की नजरों में हो जाएगी।वैसे भी भारत अगर जीत भी जाए तो लाइन लैडी की तरह तुम्हारे हाथ में भी भारत की तकदीर है ही जैसे आयरन लैडी इन्दिरा गाँधी ने भारतीय सैनिकों की जीत को पलीता लगाकर पाकिस्तान को उसकी जमीन व सैना दे दी थी वैसे तुम भी दे देना हाँ बस हम चाहते हैं कि एक बार आर पार की हो जाए क्योंकि इससे इन पाकिस्तानियों के दिमाग कुछ समय के लिए ठिकाने में आ जाऐंगे वैसे भी हमारे भाग्य में तो परेशान होना लिखा ही है कि आजादी का मूल्य हिन्दु दे लैकिन संसाधनों पर पहला हक मुसलमान व ईसाई पाएगा यह आपने पहले ही घोषित कर ही दिया है।बाकी मुझ वेवकूफ के अलाबा और भी है जिन्हौने यह कहा है लो पढ़ो और शेयर करो जो लिंक करने लायक समझे लिंक भी कर लें किन्तु चोरी न करें।        जय श्री राम
 कुछ महत्वपूर्ण लोगो की राय ---
1.जनरल शंकर राय चौधरी - श्री चौधरी का कहना हैं की हमें युद्ध की तैयारी करनी चाहिए हमें गंभीरता से विचार करना चाहिए सांस्कृतिक आदान -प्रदान भले ही चलता रहें हमें उनका जवाब उसी भाषा में देना चाहिए जो वह समझते हैं
2. भरत शर्मा --प्रमुख रक्षा विशेषज्ञ शर्मा का कहना हैं की बात चीत का समय समाप्त हो गया अब जवाब देना का समय आ गया हैं
3. मुख्तार अब्बास नकवी -- भाजपा प्रवक्ता ने कल कहा की अगर उसने दो सर काटा हैं तो हमें 20 सर काट कर उसका जवाब देना चाहिए
4. उद्धव ठाकरे -- भारत सरकार में अगर हिम्मत हैं तो पाक में घुस कर बदला लेना चाहिए नही तो पाक इस सरकार में दिल्ली में घुस जाएँगी
कारगिल युद्ध में भारत सरकार जानती थी की उपर सब पाकिस्तानी सैनिक हैं लेकिन एक बार भी अटल सरकार ने पाकिस्तान का नाम नही लिया और कहा सब आतंकवादी हैं और हमारे सैनिक लतिया कर पाक को उसकी औकात बताएं

Tuesday, January 1, 2013

कब आता है नया साल लेकर खुशियाँ ।

जव प्रकृति रो रही हो पेड़ों से पत्ते झड़ रहैं हों।पेड़ पोधे फूल रहित हों चारों तरफ वर्फ की मार पड़ रही हो सूर्य भी उदय न हो पा रहे हों।ठण्ड के कारण पशु पक्षी भी चहचहा न रहे हों फिर मानव की तो औकात ही क्या है हाँ वह विना मतलब जबरजस्ती ही कुछ शराव पी लें और नशे में ही खुशी का अनुभव करलें तो उसका तो कुछ भी नही कहा जा सकता हैं।लैकिन प्रकृति ने जो जो त्यौहार बनाऐं है सभी का अपना अपना समय निश्चित किया है।वो भी वैज्ञानिकता के साथ में पर आज का मानव भारत की हर बात को गलत सावित करने की होड़ में सही चीजों ही नही वैज्ञानिकता पर खरी उतरने बाली वातों को भी दर किनार कर रहा है। साल का उत्सब तब ही अच्छा लगता है जब मौसम सुहावना हो फूल खिल रहे हों हर तरफ खुशियाँ हों।और एसा समय होता है चेत्र मास में जवकि फसल पकने को होती है किसान खुश होता है।बागों में कोयल गीत सुनाती है पेड़ो पौधों पर मधुकर व मधुकरी गुँजन करती है चारों तरफ मधुर सुगन्ध वहता है।लो नववर्ष पर पढ़ो यह जानकारी भरा लेख लेखिका रश्मि राय का
भारतीय काल गणना पंथ निरपेक्ष होने के साथ-साथ सृष्टि की रचना व राष्ट्र की गौरवशाली परम्पराओं को दर्शाती है।
आज ...... लोगों को अंग्रेजी साल ने नव वर्ष पर....एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए .... और, शराब पीते हुए देख कर मुझे बहुत ही अजीब सा लगा....!
साथ ही.... एक बात मुझे समझ नहीं आती है कि..... आखिर हम और हमारी सरकारें ...... अंग्रेजियत के इतने दीवाने क्यों हैं...????

जबकि..... उपलब्ध साक्ष्य के अनुसार.... ग्रेगेरियन कलेण्डर की काल गणना मात्र दो हजार वर्षों के अति अल्प समय को दर्शाती है.... जबकि यूनान की काल गणना 3580 वर्ष, रोम की 2757 वर्ष यहूदी 5768 वर्ष, मिस्त्र की 28671 वर्ष, पारसी 198875 वर्ष तथा चीन की 96002305 वर्ष पुरानी है।

इन सबसे अलग .....यदि, हम भारतीय काल गणना की बात करें तो हमारे ज्योतिष के ......पृथ्वी की आयु 1 अरब 97 करोड़ 39 लाख 49 हजार 112 वर्ष है। जिसके व्यापक प्रमाण हमारे पास उपलब्ध हैं। हमारे प्राचीन ग्रंथों में एक-एक पल की गणना की गयी है।

जिस प्रकार ईस्वी सम्वत् का सम्बन्ध ईसा जगत से है....... उसी प्रकार हिजरी सम्वत् का सम्बन्धमुस्लिम जगत और हजरत मुहम्मद साहब से है।
परन्तु..... हमारी विक्रमी सम्वत् का सम्बन्ध...... किसी भी धर्म से न हो कर...... सारे विश्व की प्रकृति, खगोल सिद्धांत व ब्रह्माण्ड के ग्रहों व नक्षत्रों से है।
इसलिए भारतीय काल गणना पंथ निरपेक्ष होने के साथ-साथ सृष्टि की रचना व राष्ट्र की गौरवशाली परम्पराओं को दर्शाती है।

सिर्फ इतना ही नहीं.....ब्रह्माण्ड के सबसे पुरातन ग्रंथ वेदों में भी इसका वर्णन है।
नव संवत् यानि संवत्सरों का वर्णन यजुर्वेद के 27वें व 30वें अध्याय के मंत्र क्रमांक क्रमशः 45 व 15 में विस्तार से दिया गया ह... जो विश्व में सौर मण्डल के ग्रहों व नक्षत्रों की चाल व निरन्तर बदलती उनकी स्थिति पर ही हमारे दिन, महीने, साल और उनके सूक्ष्मतम भाग आधारित होते हैं।

इसी वैज्ञानिक आधार के कारण ही..... पाश्चात्य देशों के अंधानुकरण के बावजूद, चाहे बच्चे केगर्भाधान की बात हो, जन्म की बात हो, नामकरण कीबात हो, गृह प्रवेश या व्यापार प्रारम्भ करनेकी बात हो, सभी में हम एक कुशल पंडित के पास जाकर शुभ लग्न व मुहूर्त पूछते हैं। .
और तो और..... देश के बडे से बडे़ सेक्युलर राजनेता भी सत्तासीन होने के लिए सबसे पहले एक अच्छे मुहूर्त का इंतजार करते हैं..... जो किविशुद्ध रूप से विक्रमी संवत् के पंचांग पर आधारित होता है।

क्योंकि...भारतीय मान्यतानुसार कोई भी काम यदि शुभ मुहूर्त में प्रारम्भ किया जाये तो उसकी सफलता में चार चांद लग जाते हैं।

और... वैसे भी.... भारतीय संस्कृति श्रेष्ठता की उपासक है.... जो प्रसंग समाज में हर्ष व उल्लास जगाते हुए एक सही दिशा प्रदान करते हैं .... और, उन सभी को हम उत्सव के रूप में मनाते हैं।

फिर क्या.... हम अपनी गुलाम मानसिकता के आगे इतने बेबस हैं कि..... आज आजादी के 65 साल भी हम अपना वैज्ञानिक और सर्वश्रेष्ठ विक्रमी कैलेण्डर नहीं अपना पाए हैं...????

Friday, December 28, 2012

ये कांग्रेसी साँसद है कुछ भी कह सकते है और उस पर भारत के राष्ट्रपति पुत्र भी

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के पुत्र और सांसद अभिजीत मुखर्जी ने दिल्ली में सामूहिक बलात्कार की घटना का विरोध करने वाली महिला प्रदर्शनकारियों को बेहद रंगी पुती कहकर विवाद में फंसने के बाद माफी मांगी। उनकी इस टिप्पणी की बेहद तीखी प्रतिक्रिया हुई है और इस टिप्पणी को लोगों ने सैक्सी करार दिया है। जांगीपुर से सांसद अभिजीत ने एक स्थानीय न्यूज चैनल से बातचीत में कहा था कि रैलियों में जो छात्रों के नाम पर आ रही हैं, सुंदर सुंदर महिलाएं बेहद रंगी पुती। प्रणव मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने के बाद जांगीपुर सीट खाली हुई थी और उसी सीट पर हुए उपचुनाव में अभिजीत जीते हैं । अभिजीत ने कहा कि टीवी में साक्षात्कार दे रही हैं और अपने बच्चों को दिखा रही हैं। मुझे हैरानी है कि क्या वे कहीं से भी छात्राएं हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वास्तव में दिल्ली में जो कुछ हो रहा है, वह गुलाबी क्रांति है जिसका जमीनी सच्चाइयों से बहुत अधिक वास्ता नहीं है। उनकी इस असंवेदनशील टिप्पणी को लेकर तुरंत हंगामा खड़ा हो गया और उनकी बहन शर्मिष्ठा तक ने इस पर गहरा आघात और आक्रोश जताया तथा अपने भाई की ओर से माफी मांगी। अभिजीत ने बाद में खुद कहा कि वह इस टिप्पणी को लेकर बिना शर्त  माफी मांगते हैं और यदि पार्टी और जनता कहेगी तो वह लोकसभा सीट से इस्तीफा देने को भी तैयार हैं । महिला कार्यकर्ताओं की ओर से उनके इस्तीफे की मांग की जा रही है ।

Thursday, December 27, 2012

मोदी ने लगातार चौथी बार संभाली गुजरात की कमान


द सी एक्सप्रेस से साभार । गुजरात विधानसभा चुनावों में भाजपा को प्रभावशाली जीत दिलाने वाले नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में चौथी बार शपथ ली। उनके शपथ ग्रहण समारोह में विपक्षी कांग्रेस और सहयोगी जदयू की ओर से कोई शामिल नहीं हुआ। राज्यपाल कमला बेनीवाल ने मोदी को सरदार पटेल स्टेडियम में आयोजित समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई जिसमें भाजपा और सहयोगी दलों के अनेक वरिष्ठ नेता ने भाग लिया।
हालांकि राजग में प्रमुख सहयोगी दल जदयू तथा विपक्षी कांग्रेस की ओर से समारोह में कोई प्रतिनिधि नहीं आया। पहली बार 2001 में राज्य के मुख्यमंत्री बने मोदी ने 2002 तथा 2007 में भी प्रदेश की कमान संभाली। बुधवार को उनके साथ सात कैबिनेट मंत्रियों और नौ राज्य मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण की। नितिन पटेल, आनंदी पटेल, रमन वोरा, भूपेंद्रसिंह चूडासामा, सौरभ पटेल, गणपत वसावा और बाभभाई बोखियारिया ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली, वहीं पुरुषोत्तम सोलंकी, प्रभात पटेल, वासुबेन त्रिवेदी, प्रदीपसिंह जडेजा, लीलाधर वाघेला, रजनीकांत पटेल, गोविन्द पटेल, नानूभाई वनानी और जयंती कावडिया ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली। मोदी ने शपथ ग्रहण समारोह के बाद ट्वीट किया, चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। एक यादगार दिन। मैं आश्वस्त करता हूं कि जनता ने हम पर जो विश्वास जताया है, हम उस पर खरे उतरेंगे। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, समारोह में शामिल होने वाले लोगों, वरिष्ठ नेताओं और आध्यात्मिक नेताओं को तथा इसका सीधा प्रसारण देखने वालों को मेरा धन्यवाद।
भाजपा में अभी तक प्रधानमंत्री पद के दावेदार को लेकर रुख साफ नहीं हुआ है लेकिन इसी बीच एकजुटता प्रदर्शित करते हुए पार्टी के अनेक वरिष्ठ नेता समारोह में जुटे।
इनमें लालकृष्ण आडवाणी, लोकसभा और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष क्रमश: सुषमा स्वराज और अरुण जेटली, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह तथा कर्नाटक के मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार शामिल हुए।
गुजरात में शपथ ग्रहण से पहले विजयी मुद्रा में लोगों का अभिवादन करते नरेंद्र मोदी।
. जदयू और कांग्रेस ने किया समारोह का बहिष्कार . अमित शाह को मंत्री पद से रखा महरूम

क्रिसमस पर पाँच हजार ईसाई पुनः हिन्दु बने

आजादी के पहले या कहैं कि अग्रेंजों के आगमन के बाद से ही भारत पर ईसाई धर्मप्रचारकों की कुटिल निगाह लगी हूयी है वास्तव में इनका उद्देश्य लोगों की सेवा करना न होकर भारत को किसी भी प्रकार ईसाई राष्ट्र बनाना है।जिससे यूरोप बासियों का भारत हमेशा गुलाम बना रहै सभी जानते हैं कि जैसे ही कोई व्यक्ति ईसाई धर्म या इस्लाम धर्म ग्रहण करता है तुरंत ही उसकी आस्था ईटली,रोम या यूरोप के राष्ट्रों की तरफ हो जाती है।या अगर इस्लाम ग्रहण करता है तो उसकी आस्था अरव देश के पक्ष में हो जाती है।यह बात अब लगभग भारत के ईसाई बने लोगों को समझ आने लगी है भारत की जड़ो को खोखला करने का प्रयास करने बाले अनेको ईसाई राजनेता भारत के शिखर नेतृत्व में विराजमान है जो लगातार भारतीय आस्थाओं पर प्रहार करके अपने आपको महिमामंडित कर रहै है यह कहना भी अतिश्योक्ति नही होगी कि भारत की एक राजनेता जिन्है भारत का बच्चा बच्चा सोनिया गांधी के नाम से जानता है उन्होने तो भारत के प्रधानमंत्री से भी ज्यादा प्रभाव बनाया हुआ है जिसके कारण भारत नामक धर्मनिरपेक्ष कहै जाने बाले राष्ट्र की मुद्रा पर ईसाई चिन्ह क्रास तक बन गया और तो औऱ भारत के वास्तविक नागरिक को दोयम दर्जे का बनाने का एक प्रयास लक्ष्यित हिंसा विधेयक बनाकर करने का किया गया किन्तु वो तो इन बाकी नेताऔ को अक्ल आ गयी नही तो हिन्दु का सत्यानाश करने का ही यह प्रयास था।
         आगरा।क्रिसमस पर कोठी मीना बाजार में सोमबार को उन पाँच हजार हिन्दुओं ने दोबारा हिन्दु धर्म अपना लिया जिन्हौने पहले हिन्दु धर्म छोड़कर ईसाइयत अपना ली थी लैकिन कुछ ही दिनों में मोह भंग हो गया और अपने पुराने घर बापस आने को वेकरार होने लगे ।कारण रहा इसाईयत की अमानवीयता जिसमें औरत को केवल भोग की बस्तु मानकर उस पर तमाम प्रकार के अत्याचार किये जाते हैं।जिससे मानवता भी शर्मशार हो जाती है।सैकड़ो की मात्रा में नन बनाकर उनका यौन शोषण किया जाता है।
25दिसम्वर की सुबह से ही एसे लोगों का कोठी मीनाबाजार पहुँचना शु्रू हो गया था धर्मजागरण समिति,ब्रजप्रान्त द्वारा आयोजित किये गये वाल्मीकि सम्मेलन में यज्ञ की वेदी को साक्षी मानकर इन लोगों ने शपथ भी ली कि अब कभी अपने पावन हिन्दु धर्म को छोड़कर कभी किसी दूसरे धर्म को ग्रहण नही करेंगें।कार्यक्रम में धर्म जागरण समिति के अखिल भारतीय सह प्रमुख राजेन्द्र प्रसाद जी ने लोगों को संबोधित करते हुये बताया कि देश में जहाँ जहाँ हिन्दुओं की संख्या कम होती जा रही है वह हिस्सा देश से कटने के कगार पर पहुँच चुका है।इसलिये हमे गंभीरता से विचार करते हुय़े हिन्दुओं की संख्या विस्तार के बारे में सोचना होगा।कई प्रदेशों में हिन्दु अल्पमत में आ चुका है। धर्म जागरण समन्वय विभाग के क्षेत्र प्रमुख राजेश्वर सिंह ने बताया कि इस साल आगरा, अलीगढ़ और बरेली के उन बारह हजार से अधिक हिन्दुओ की घर बापसी हुयी है जिन्हौने पहले किसी कारण से हिन्दु धर्म छोड़ कर ईसाइयत को अपना लिया था।

Saturday, December 15, 2012

लव जिहाद के रास्ते यदि तुम एड्स से मर गये तो भी तुम शहीद हो

 इस्लाम वह धर्म जिसने अपने पैदा होने के साथ ही हमेशा से दुनिया को दो हिस्सों में बाँट दिया एक दारुल हरब व दूसरा दारुल इस्लाम और मुसलमानो में बाकी अन्य के लिए जहर भर दिया। यह प्रेरणा प्रदान करने बाली किताब है कुरान जिसकी आयते मुस्लिम लड़को को या कहै कि कुल मुसलमानों को एसी प्रेरणा देती हैं कि अच्छा से अच्छा व सामान्य रुप में रहने बाला मुसलमान भी विश्वसनीय नही रहता लो मेरे मित्र मनोज झा की दी यह जानकारी जो उन्हौने अपनी फेसवुक आई डी पर दी है।
अय्याशी से मरे जिहादी शहीद हैं !!

आजकल मुस्लिम नौजवान जिहादियों का अंजाम देखकर भी लव जिहाद कर रहे हैं .और इसे एक धार्मिक कार्य मान रहे हैं .और सोच रहे हैं कि ऐसा करने से उनको मरने के बाद शहीद का दर्जा मिल जायेगा .और वे जन्नत में अय्याशी कर सकेंगे .
आपने यह प्रसिद्ध कहावत जरुर सुनी होगी "हर्र लगे न फिटकरी ,रंग पक्का हो जाये "यह कहावत इस्लाम में जिहाद सम्बन्धी मान्यताओं पर सटीक उतरती है .इस बात को स्पष्ट करने के लिए हमें कुरान और कुछ प्रमुख हदीसों का हवाला होगा ,जिसे बिन्दुवार दिया गया है .
1-जिहाद अल्लाह को प्रिय है
इस्लाम में जिहाद को अनिवार्य ,और अल्लाह की नजर में सबसे प्रिय कार्य बताया गया है .कुरान में कहा है कि,
"अल्लाह उन लोगों लो प्यार करता है ,जो पंक्ति बनाकर जिहाद करते है "सूरा-अस सफ्फ 61 :4
"जिहाद करना अल्लाह कि नजर में सबसे प्रिय कार्य है "सूरा -तौबा 9 :24
आजकल जकारिया नायक जैसे इस्लामी प्रचारक यह कहते हुए नहीं थकते कि ,जिहाद असल में एक संघर्ष (struggle ) है जो धर्म की रक्षा करने ,अपना बचाव करने ,पीड़ितों को उनका अधिकार दिलवाने और शांति स्थापना के लिए किया जाता है .लेकिन जिहाद का असली मकसद कुछ और ही है ,जो यहाँ दिया जा रहा है .
2-जिहादियों के लिए प्रलोभन
लोग देश ,धर्म और न्याय की रक्षा के लिए बिना किसी प्रतिफल की इच्छा के अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते है ,यहाँतक अपने प्राणों का बलिदान कर देते है .अगर जिहाद का यही मकसद है तो ,अल्लाह जिहादियों को लालच क्यों देता है .जैसा कुरान और इन हदीसों में है -
"जितने भी लोग अपनी जान लगाकर जिहाद करेंगे उनके लिए फायदा ही फायदा होगा "सूरा -तौबा 9 :88
"हे रसूल कहो जो व्यक्ति जिहाद के लिए हथियार खरीदने के लिए एक दिरहम देगा ,तो जीत के बाद उसे एक दिरहम के बदले 70 हजार दीनार दिए जायेंगे "
इब्न माजा -किताब 4 हदीस 2761
"रसूल ने कहा कि जो व्यक्ति जिहाद के लिए बाहर जायेगा तो ,अल्लाह उसके घर कि रक्षा करेगा .और जब वह वापस आयेगा तो उसे लूट का माल और साथ में औरतें भी मिलेंगीं "मुस्लिम -किताब 3 हदीस 4626
"रसूल ने कहा मैं तुम्हें एक खुशखबरी देता हूँ ,जब मुजाहिद वापिस आएंगे तो उनके लिए बगीचे तैयार मिलेंगे "
बुखारी -जिल्द 1 किताब 52 हदीस 48
"इसी प्रकार ''सर्वोत्तम जिहाद वह है जिसमें घोड़ा और सवार दोनों ही घायल हो जायें।'' इब्न माजाह, खं. 4 हदीस 2794,
3-अय्याशी के लिए जिहाद
इस्लाम में औरतों को माल (property -booty ) माना जाता है .जिहादी सबसे पहले औरतें ही पकड़ते हैं .ऐसी पकड़ी गयी औरतों को लौंडी कहा जाता है ,या रखैल कहते हैं .इन से सहवास करना कुरान में जायज कहा है .और जब औरत से मन भर जाता था तो उनको बेच देते है ,कुरान की तरह, हदीसों में भी विजित गैर-मुसलमानों के धन, सम्पत्ति व स्त्रियों पर विजेता मुसलमानों का अधिकार होगा.चूंकि जिहादियों को असीमित अय्याशी करने की सुविधा शहीद हो जाने पर जन्नत में ही मिल सकती थी .इसलिए मुसलमानों ने यहीं पर भोग विलास की तरकीब निकाल ली .और पकड़ी गयी औरतों से सहवास जो जायज बना दिया ,यह बार मिर्जा ग़ालिब ने फारसी में लिखा है ,
"सुखने सादा दिलम रा न फरेबदअय ग़ालिब ,बोसये चंद नकद गंज दिहाने बिमन आर "यानि मेरा दिल उधार बातों से नहीं फिसलता ,मुझे तो किसी सुंदरी का नकद चुम्बन चाहिए "कुरान ने जिहादियों को यही देनेका वादा किया है .इसीलिए जिहाद हो रहा है .सबूत देखिये ,
"हमने तुम्हें युद्ध में पकड़ी हुई औरतें (लौंडियाँ ) हलाल कर दी हैं ,और अगर ( इस्तेमाल के बाद ) तुम्हें वह पसंद नहीं आयें ,तो तुम दूसरी औरतें बदल सकते हो "
सूरा -अहजाब 33 :52
"अपनी पत्नियों के साथ जो औरतें तुम्हारे कब्जे में हों ,उनके साथ सहवास करने में कोई निंदनीय काम नहीं है "सूरा -मआरिज 70 :30
इस तरह सिर्फ जिहादी ही अय्याशी नहीं करते हैं ,उनके नाबालिग लडके भी यही करते हैं ,जो इन हदीसों से पता चलता है ,
"रसूल ने कहा कि क्या तुम नहीं जानते कि अल्लाह ने पकड़ी गयी औरतें काफिरों को अपमानित करने के लिए ही तुम्हारी सेवा में दी है "
बुखारी -जिल्द 1 किताब 3 हदीस 803
"रसूल ने कहा कि तुम्हारा अवयस्क लड़का भी बिस्तर (Bed ) का मालिक है .और वह भी पकड़ी गयी औरतों से अवैध सहवास कर सकता है "
बुखारी -जिल्द 1 किताब 8 हदीस 808
The Prophet said, "The boy is for the owner of the bed and the for the person who commits illegal sexual intercourse."Hadith-vol bk8. hadith no808 Al-Bukhari
इसी शिक्षा के कारण छोटे बड़े सभी अय्याशी करने में व्यस्त हो गए .और जन्नत को भूल गए .
4-जिहाद से अरुचि
कहावत है कि "जहाँ भोग वहां रोग " जब जिहादी असीमित अय्याशी करने लगे तो भिभिन्न रोगों में ग्रस्त हो गए .और उचित इलाज न मिलाने से बीमार होगर जिहाद से विमुख हो गए .उसी समय एक सहाबी "अबू उबैदा अम्मार बिन इब्नल जर्राह (583-638)" यौन रोग से ग्रस्त हो गया .जो बाद में मर भी गया था .तो जिहादियों में भय व्याप्त हो गया ,वह अगले जन्म कि इच्छा करने लगे .तब मुहम्मद ने उन लोगों से यह कहा कि ,
"जो इस दुनिया में मर कर दूसरी दुनिया में फिर से आने कि कमाना रखता है ,उसे अल्लाह रह में जिहाद करते हुए कम से कम दस बार मरना पड़ेगा "
बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 72
"रसूल ने कहा कोई व्यक्ति मर कर दोबारा इस दुनिया में फिर से तब तक नहीं असकता ,जब तक वह अल्लाह कि रह में मर कर जिहादियों में वरीयता प्राप्त नहीं कर लेता "बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 53
5 -जिहादियों की पाठ्यपुस्तक
मुहम्मद हर हालत में जिहाद चालू रखना चाहता था .और जब लोग काफी अशक्त हो गए तो मुहमद ने उन लोगों से कहा कि ,
"जो जिहादी पेट के रोग ,प्लेग ,या यौन रोगों के कारण मर जायेगा ,उसे भी शहीद माना जायेगा और वह भी जन्नत का अधिकारी होगा ,जहाँ उसे सारी सुविधाएँ मिलेंगी "बुखारी -जिल्द 1 किताब 7 हदीस 629
उस समय मुहम्मद ने जिहादियों का हौसला बढ़ने के लिए कई ऐसी ही हदीसें कही थीं .जिसे बाद में "(ابو زكريا يحي بن يوسف انووي ادّمشقي )इमाम अबू जकारिया याहया बिन यूसुफ अन नववी दमिश्की (1234 -1278 ) ने हिजरी 676 में सीरिया में संकलित किया था .इस हदीस के संकलन का नाम " रियाज उस्सालिहीनRiyadh as-Saaliheen رياض الصالحين" है .इसीको जिहादियों की पाठ्य पुस्तक (The Gardens of the Righteous ) कहा जाता है .इसमे कुल 19 अध्याय है .और 11 अध्याय के भाग 235 में हदीस संख्या 1353 से लेकर 1357 तक अनेकों रोग से मरने वाले जिहादियोंको शहीद बताया गया है .विषय संख्या 235 की 5 हदीसों का शीर्षक है "martyrdom without fight " उसी का सारांश हिंदी में दिया जा रहा है (अंगरेजी में पूरी किताब की लिंक दी गयी है )देखिये कुकर्म करके मरने वाले भी शहीद कैसे बन जाते हैं ,और जानत में कैसे घुस जाते हैं
"अबू हुरैरा नेकहा किरसूल ने कहा कि शहीद पांच कारणों से हो सकते है ,प्लेग से , पेट के रोगों के कारण,अति सहवास के कारण ,मकान बनाते समय मलबे से दब कर और अल्लाह के लिए लड़ते हुए मरने वाले "हदीस -1353
"अबू हुरैरा ने रसूल से पूछा कि आप हम लोगों में किसको शहीद गिनोगे ,तो रसूल ने कहा ऐसे बहुत ही कम लोग होंगे जो अल्लाह की राह में लड़ कर मर कर शहीद होंगे .कुछ बीमारियों के कारण भी शहीद हो जाते हैं ,जैसे प्लेग से ,तपेदिक से ,यौन रोगों के कारण और पानी में डूब कर मरने वाले भी शहीद माने जायेंगे "
हदीस -1354
बाकी तीन हदीसों ,1355 ,1356 और 1357 में अपनी सम्पति ,अपने परिवार कि रक्षा में मरने वाले को और दुश्मन से लड़ते हुए मर जाने वालों को भी शहीद का दर्जा देकर जन्नत का अधिकारी बताया गया है .इसलिए यह हदीसें अधिक महत्वपूर्ण नहीं हैं .इन सभी प्रमाणों से सिद्ध होता है कि यह बात झूठ है कि जिहादी अल्लाह की राह में बिना किसी लोभ और स्वार्थ के जिहाद करते हैं .और मर जाने पर शहीद कहलाते हैं .जबकि अधिकांश जिहादी अय्याशी करके अनेकों रोग होने से भी मर जाते थे .चूँकि उस समय एड (AIDS ) के बारे में पता नहीं था ,इसलिए यौन रोगों को तपेदिक ,प्लेग या गुर्दे का रोग कहा दिया होगा .आज भी मुस्लिम देशों में ऐसे रोगियों से अस्पताल भरे पड़े हैं .फिर भी इन्हीं हदीसों के कारण मुसलमान अय्याशी को ही जिहाद का रूप समझते हैं .इसका परिणाम सद्दाम हुसैन ,कर्नल गदाफी ,ओसामा बिन लादेन के रूप में दुनिया जानती है .औरतबाजी का बुरा नतीजा होता है .और इसमे शक नहीं कि लवजिहाद कभी यही अंजाम होगा !
जो व्यक्ति अय्याशी को जिहाद और एड्स से मरने वालों को शहीद मानता है उसका दिमाग ख़राब होगा .

भिखारी हैं सब यहाँ (इण्डिया की हकीकत)

 
भिखारी हैं सब यहाँ

लोकल ट्रेन से उतरते ही हमने सिगरेट जलाने के लिए एक साहब से माचिस माँगी, तभी किसी भिखारी ने हमारी तरफ हाथ बढ़ाया,
हमने कहा- "भीख माँगते शर्म न हीं आती....?"

ओके, वो बोला- "माचिस माँगते आपको आयी थी क्या....?"

बाबू जी! माँगना देश का करेक्टर है,
जो जितनी सफ़ाई से माँगे उतना ही बड़ा एक्टर है,

ये भिखारियों का देश है लीजिए!

भिखारियों की लिस्ट पेश है,

धंधा माँगने वाला भिखारी
चंदा माँगने वाला
दाद माँगने वाला
औलाद माँगने वाला
दहेज माँगने वाला
नोट माँगने वाला
और तो और वोट माँगने वाला

हमने काम माँगा तो लोग कहते हैं चोर है,

भीख माँगी तो कहते हैं, कामचोर है,

उन्हें कुछ नहीं कहते, जो एक वोट के लिए,
दर-दर नाक रगड़ते हैं,

घिस जाने पर रबर की खरीद लाते हैं,
और उपदेशों की पोथियाँ खोलकर, महंत बन जाते हैं।

लोग तो एक बिल्ले से परेशान हैं, यहाँ सैकड़ों बिल्ले खरगोश की खाल में देश के हर कोने में विराजमान हैं।

हम भिखारी ही सही, मगर राजनीति समझते हैं,

रही अख़बार पढ़ने की बात तो अच्छे-अच्छे लोग, माँग कर पढ़ते हैं,

समाचार तो समाचार, लोग बाग पड़ोसी से, अचार तक माँग लाते हैं, रहा विचार!
तो वह बेचारा, महँगाई के मरघट में,
मुद्दे की तरह दफ़न हो गया है।

समाजवाद का झंडा, हमारे लिए कफ़न हो गया है,

कूड़ा खा रहे हैं और बदबू पी रहे हैं, उनका फोटो खींचकर फिल्म वाले लाखों कमाते हैं
झोपड़ी की बात करते हैं मगर जुहू में बँगला बनवाते हैं।

हमने कहा "फिल्म वालों से तुम्हारा क्या झगड़ा है ?"

वो बोला- "आपके सामने भिखारी नहीं भूतपूर्व प्रोड्यूसर खड़ा है बाप का बीस लाख फूँक कर हाथ में कटोरा पकड़ा....!"

हमने पाँच रुपए उसके हाथ में रखते हुए कहा- "हम भी फिल्मों में ट्राई कर रहे हैं !"

वह बोला, "आपकी रक्षा करें दुर्गा माई से आपके लिए दुआ करूँगा लग गई तो ठीक वरना आपके पाँच में अपने पाँच मिला कर दस आपके हाथ पर धर दूँगा....!"

Tuesday, December 11, 2012

यह कैसी शासन व्यवस्था है।जिस पर हमारा कोई नियंत्रण नही -योगेश गर्ग



* यदि सरकारी टीचर स्कूल में पढ़ाने न आए तो आप क्या कर सकते हैं?
*यदि डॉक्टर मरीज का इलाज न करे तो आप क्या कर सकते हैं?
* यदि राशन दुकानदार सरेआम आपके राशन की चोरी करे तो आप क्या
कर सकते हैं?
* यदि पुलिस वाला हमारी शिकायत पर कार्रवाई न करे तो आप क्या कर सकते हैं?
* यदि सरकारी इंजीनियर ठेकेदार से रिश्वत खाकर घटिया सड़क पास कर
दे जो चंद दिनों में टूट जाए तो आप क्या कर सकते हैं?
* आप क्या कर सकते हैं यदि सफाईकर्मी अपना काम ठीक से नहीं करते और आपका इलाका बदबू मारता है?

ज्यादा से ज्यादा हम बड़े अफसरों को शिकायत करते हैं लेकिन हमारी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं होती। कुल मिलाकर, सरकारी स्कूलों में न आने वाले शिक्षकों या सफाई न करने वाले सफाईकर्मी, राशन दुकानदार, सरकारी ठेकेदार, नेताओं, पुलिसवालों या अफसरों पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है।
और यही कारण है कि आजादी के 65 साल बाद भी देश में इतनी अशिक्षा और गरीबी है। लोग टीबी जैसी सामान्य बीमारी से मर रहे हैं। लोग भूखे पेट सोने को मजबूर हैं। सड़कें टूटी हुई हैं और शहर गंदगी का ढेर बन गए हैं।
कहने को तो लोकतंत्र में हम मालिक हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि इसमें हमारी भूमिका सिर्फ 5 साल में एक बार वोट देने तक ही सीमित है और अगले 5 साल हम नेताओं और असफरों के सामने गिड़गिड़ाते रहते हैं जो हमारी एक नहीं सुनते।
तो फिर क्या आपको नही लगता कि देश मे व्यवस्था में परिवर्तन होना चाहिये …
जनता का शासन जनता के हाथ में दिया जाना चाहिये … जो अभी जनता के नाम पर कुछ चुनिंदा लोगो के हाथ में सीमित है …
आइये पहल करे 'स्वराज' की, समाज में जागरुकता बढाये … लोकतंत्र और नागरिक अधिकारो और कर्तव्य की समझ बढाये … लोगो मे राजनीति की समझ बढाये ताकि वो अपने शासन को श्रेष्ठतम रीति से चला सके …

योगेश गर्ग
‎* यदि सरकारी टीचर स्कूल में पढ़ाने न आए तो आप क्या कर सकते हैं?
*यदि डॉक्टर मरीज का इलाज न करे तो आप क्या कर सकते हैं?
* यदि राशन दुकानदार सरेआम आपके राशन की च
ोरी करे तो आप क्या
कर सकते हैं?
* यदि पुलिस वाला हमारी शिकायत पर कार्रवाई न करे तो आप क्या कर सकते हैं?
* यदि सरकारी इंजीनियर ठेकेदार से रिश्वत खाकर घटिया सड़क पास कर
दे जो चंद दिनों में टूट जाए तो आप क्या कर सकते हैं?
* आप क्या कर सकते हैं यदि सफाईकर्मी अपना काम ठीक से नहीं करते और आपका इलाका बदबू मारता है?

ज्यादा से ज्यादा हम बड़े अफसरों को शिकायत करते हैं लेकिन हमारी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं होती। कुल मिलाकर, सरकारी स्कूलों में न आने वाले शिक्षकों या सफाई न करने वाले सफाईकर्मी, राशन दुकानदार, सरकारी ठेकेदार, नेताओं, पुलिसवालों या अफसरों पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है।
और यही कारण है कि आजादी के 65 साल बाद भी देश में इतनी अशिक्षा और गरीबी है। लोग टीबी जैसी सामान्य बीमारी से मर रहे हैं। लोग भूखे पेट सोने को मजबूर हैं। सड़कें टूटी हुई हैं और शहर गंदगी का ढेर बन गए हैं।
कहने को तो लोकतंत्र में हम मालिक हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि इसमें हमारी भूमिका सिर्फ 5 साल में एक बार वोट देने तक ही सीमित है और अगले 5 साल हम नेताओं और असफरों के सामने गिड़गिड़ाते रहते हैं जो हमारी एक नहीं सुनते।
तो फिर क्या आपको नही लगता कि देश मे व्यवस्था में परिवर्तन होना चाहिये …
जनता का शासन जनता के हाथ में दिया जाना चाहिये … जो अभी जनता के नाम पर कुछ चुनिंदा लोगो के हाथ में सीमित है …
आइये पहल करे 'स्वराज' की, समाज में जागरुकता बढाये … लोकतंत्र और नागरिक अधिकारो और कर्तव्य की समझ बढाये … लोगो मे राजनीति की समझ बढाये ताकि वो अपने शासन को श्रेष्ठतम रीति से चला सके …

                                                                योगेश गर्ग

Monday, December 10, 2012

वास्तु शास्त्र के आसान से उपाय


vastu ke aasan upay ya tips.....
कभी-कभी ऐसा होता है कि व्यक्ति सर्वगुण सम्पन्न होते हुए भी बेरोजगार रह जाता है। वह नौकरी के लिए जितना अधिक प्रयास करता है, उसकी कोशिश विफल होती जाती है। इसके लिए व्यक्ति भाग्य को जिम्मेदार ठहराता है। लेकिन अपने भाग्य को कोसने के बजाय एक उपाय करें- नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाएं, तो जेब में लाल रूमाल या कोई लाल कपड़ा रखें। सम्भव हो, तो शर्ट भी लाल हनें। आप जितना अधिक लाल रंग का प्रयोग कर सकते हैं, करें।

लेकिन यह याद रखें कि लाल रंग भड़कीला ना लगे सौम्य लगे। रात में सोते समय शयन कक्ष में पीले रंग का प्रयोग करें। याद रखें, लाल, पीला व सुनहरा रंग आपके भाग्य में वृद्धि लाता है। अतः हमेशा अपने साथ रखें व इन रंगों का व्यवहार ज्यादा से ज्यादा करें, सफलता मिलेगी।
जीवन में पीले रंग को सफलता का सूचक कहा जाता है। पीला रंग भाग्य में वृद्धि लाता है। कन्या की शादी में पीले रंग का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग किया जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि कन्या ससुराल में सुखी रहेगी।

विवाह निर्विघ्न होने की शुभ सूचना वस्तुतः हल्दी से सम्पन्न होती है, क्योंकि हल्दी को गणेशजी की उपस्थिति माना जाता है। और जिस कार्य में गणेश जी स्वयं उपस्थित हों, उस कार्य को पूरा करने में विघ्न कैसे आ सकता है।

हल्दी की गांठों में कभी-कभी गणेश जी की मूर्ति का चित्र मिलता है। लक्ष्मी अन्नपूर्णा भी हरिद्रा कहलाती हैं। श्री सूक्त में वर्णन किया गया है कि लक्ष्मी जी पीत वस्त्र धारण किए है। अतः आप समझ सकते हैं कि हल्दी का कितना महत्व है। इतना ही नहीं, बृहस्पति का रंग भी पीत वर्ण का है, तभी तो पीत रंग का पुखराज पहनकर बृहस्पति की कृपा प्राप्त होती है।
                                              Dinesh Kumar Sahu

फिर याद करे क्रान्तिवीर प्रफुल्ल चन्द्र चाकी को - 10 दिसम्बर पर विशेष

 आज है 10 दिसम्बर आज के ही दिन सन 1888 में एक वीर भारत माँ की कोख  से निकल कर पैदा हुआ जिसका नाम था प्रफुल्ल चन्द्र चाकी लैकिन आज उस वीर की माटी अपने देश की माटी नही हैआज वो हो गयी है विदेशी धरती। देश के चिर परिचित छदम देशभक्तों ने वह धरती हमारी भारत माँ के आँचल से अलग कर दी है।स्थान था बंगाल का उत्तरी भाग में स्थित बोगरा गाँव जहा यह बीर पैदा हुआ आज यह स्थान है बांग्लादेश में। यह बीर भारत माँ की बगिया में खिला वह पुष्प था जो स्वंय एक कली के रुप में ही माँ की सेवा में काम आ गया।मैं इस भारत के अमर सपूत को कोटि बार नमन करता हूँ मेरे पास उन्है चढाने के लिए केवल श्रद्धा सुमन ही हैं क्योकि इन्है भारत की स्वाधीनता की ख्वाहिस ही तो थी जिसके लिए वे वेदी पर स्वाहा हो गये।है अमर वलिदानी आ जा हमारे बीच जिससे हम पुनः देश से इन गद्दारों का सफाया कर सकें तुम नौजवानों को प्रेरणा देते रहो जिससे भारत से गुलामी जो दिलों में है का विनाश हो जाए 
                          ज्ञानेश कुमार वार्ष्णेय 
आज यह पोस्ट मैने ली है एक और इंकलाव नाम के फेसबुक पेज से धन्यबाद लिखने बाले भाई को भी 
॥ एक और इंकलाब ॥॥ shared हिन्दुस्तान - मेरा इश्क ,मेरा जुनून,मेरी जान **'s photo.
Photo: सन १८८८ में आज १० दिसम्बर के दिन जन्मे क्रांतिकारी प्रफुल्ल चाकी का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। प्रफुल्ल का ज...न्म उत्तरी बंगाल के बोगरा गाँव (अब बांग्लादेश में स्थित) में हुआ था। जब प्रफुल्ल दो वर्ष के थे तभी उनके पिता जी का निधन हो गया। उनकी माता ने अत्यंत कठिनाई से प्रफुल्ल का पालन पोषण किया। विद्यार्थी जीवन में ही प्रफुल्ल का परिचय स्वामी महेश्वरानंद द्वारा स्थापित गुप्त क्रांतिकारी संगठन से हुआ और उनके अन्दर देश को स्वतंत्र कराने की भावना बलवती हो गई। इतिहासकार भास्कर मजुमदार के अनुसार प्रफुल्ल चाकी राष्ट्रवादियों के दमन के लिए बंगाल सरकार के कार्लाइस सर्कुलर के विरोध में चलाए गए छात्र आंदोलन की उपज थे। पूर्वी बंगाल में छात्र आंदोलन में उनके योगदान को देखते हुए क्रांतिकारी बारीद्र घोष उन्हें कोलकाता ले आए जहाँ उनका सम्पर्क क्रांतिकारियों की युगांतर पार्टी से हुआ। उन्हें पहला महत्वपूर्ण काम अंग्रेज सेना अधिकारी सर जोसेफ बैंफलाइड फुलर को मारने का दिया गया पर यह योजना कुछ कारणों से सफल नहीं हु
ई।
क्रांतिकारियों को अपमानित करने और उन्हें दण्ड देने के लिए कुख्यात कोलकाता के चीफ प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड को जब क्रांतिकारियों ने जान से मार डालने का निर्णय लिया तो यह कार्य प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस को सौंपा गया। दोनों क्रांतिकारी इस उद्देश्य से मुजफ्फरपुर पहुंचे जहाँ ब्रिटिश सरकार ने किंग्सफोर्ड के प्रति जनता के आक्रोश को भाँप कर उसकी सरक्षा की दृष्टि से उसे सेशन जज बनाकर भेज दिया था। दोनों ने किंग्सफोर्ड की गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन किया एवं ३० अप्रैल १९०८ ई० को किंग्सफोर्ड पर उस समय बम फेंक दिया जब वह बग्घी पर सवार होकर यूरोपियन क्लब से बाहर निकल रहा था। लेकिन जिस बग्घी पर बम फेंका गया था उस पर किंग्सफोर्ड नहीं था बल्कि बग्घी पर दो यूरोपियन महिलाएँ सवार थीं। वे दोनों इस हमले में मारी गईं।
दोनों क्रन्तिकारी घटनास्थल से भाग निकले परन्तु मोकामा स्टेशन पर चाकी को पुलिस ने घेर लिया| उन्होंने अपनी रिवाल्वर से अपने ऊपर गोली चलाकर अपनी जान दे दी। यह घटना १ मई, १९०८ की है। बिहार के मोकामा स्टेशन के पास प्रफुल्ल चाकी की मौत के बाद पुलिस उपनिरीक्षक एनएन बनर्जी ने चाकी का सिर काट कर उसे सबूत के तौर पर मुजफ्फरपुर की अदालत में पेश किया। यह अंग्रेज शासन की जघन्यतम घटनाओं में शामिल है। चाकी का बलिदान जाने कितने ही युवकों का प्रेरणाश्रोत बना और उसी राह पर चलकर अनगिनत युवाओं ने मातृभूमि की बलिवेदी पर खुद को होम कर दिया| महान हुतात्मा को आज उनके जन्मदिवस पर कोटिशः नमन|
सन १८८८ में आज १० दिसम्बर के दिन जन्मे क्रांतिकारी प्रफुल्ल चाकी का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। प्रफुल्ल का ज...न्म उत्तरी बंगाल के बोगरा गाँव (अब बांग्लादेश में स्थित) में हुआ था। जब प्रफुल्ल दो वर्ष के थे तभी उनके पिता जी का निधन हो गया। उनकी माता ने अत्यंत कठिनाई से प्रफुल्ल का पालन पोषण किया। विद्यार्थी जीवन में ही प्रफुल्ल का परिचय स्वामी महेश्वरानंद द्वारा स्थापित गुप्त क्रांतिकारी संगठन से हुआ और उनके अन्दर देश को स्वतंत्र कराने की भावना बलवती हो गई। इतिहासकार भास्कर मजुमदार के अनुसार प्रफुल्ल चाकी राष्ट्रवादियों के दमन के लिए बंगाल सरकार के कार्लाइस सर्कुलर के विरोध में चलाए गए छात्र आंदोलन की उपज थे। पूर्वी बंगाल में छात्र आंदोलन में उनके योगदान को देखते हुए क्रांतिकारी बारीद्र घोष उन्हें कोलकाता ले आए जहाँ उनका सम्पर्क क्रांतिकारियों की युगांतर पार्टी से हुआ। उन्हें पहला महत्वपूर्ण काम अंग्रेज सेना अधिकारी सर जोसेफ बैंफलाइड फुलर को मारने का दिया गया पर यह योजना कुछ कारणों से सफल नहीं हुई। क्रांतिकारियों को अपमानित करने और उन्हें दण्ड देने के लिए कुख्यात कोलकाता के चीफ प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड को जब क्रांतिकारियों ने जान से मार डालने का निर्णय लिया तो यह कार्य प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस को सौंपा गया। दोनों क्रांतिकारी इस उद्देश्य से मुजफ्फरपुर पहुंचे जहाँ ब्रिटिश सरकार ने किंग्सफोर्ड के प्रति जनता के आक्रोश को भाँप कर उसकी सरक्षा की दृष्टि से उसे सेशन जज बनाकर भेज दिया था। दोनों ने किंग्सफोर्ड की गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन किया एवं ३० अप्रैल १९०८ ई० को किंग्सफोर्ड पर उस समय बम फेंक दिया जब वह बग्घी पर सवार होकर यूरोपियन क्लब से बाहर निकल रहा था। लेकिन जिस बग्घी पर बम फेंका गया था उस पर किंग्सफोर्ड नहीं था बल्कि बग्घी पर दो यूरोपियन महिलाएँ सवार थीं। वे दोनों इस हमले में मारी गईं। दोनों क्रन्तिकारी घटनास्थल से भाग निकले परन्तु मोकामा स्टेशन पर चाकी को पुलिस ने घेर लिया| उन्होंने अपनी रिवाल्वर से अपने ऊपर गोली चलाकर अपनी जान दे दी। यह घटना १ मई, १९०८ की है। बिहार के मोकामा स्टेशन के पास प्रफुल्ल चाकी की मौत के बाद पुलिस उपनिरीक्षक एनएन बनर्जी ने चाकी का सिर काट कर उसे सबूत के तौर पर मुजफ्फरपुर की अदालत में पेश किया। यह अंग्रेज शासन की जघन्यतम घटनाओं में शामिल है। चाकी का बलिदान जाने कितने ही युवकों का प्रेरणाश्रोत बना और उसी राह पर चलकर अनगिनत युवाओं ने मातृभूमि की बलिवेदी पर खुद को होम कर दिया| महान हुतात्मा को आज उनके जन्मदिवस पर कोटिशः नमन|सन १८८८ में आज १० दिसम्बर के दिन जन्मे क्रांतिकारी प्रफुल्ल चाकी का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। प्रफुल्ल का ज...न्म उत्तरी बंगाल के बोगरा गाँव (अब बांग्लादेश में स्थित) में हुआ था। जब प्रफु
ल्ल दो वर्ष के थे तभी उनके पिता जी का निधन हो गया। उनकी माता ने अत्यंत कठिनाई से प्रफुल्ल का पालन पोषण किया। विद्यार्थी जीवन में ही प्रफुल्ल का परिचय स्वामी महेश्वरानंद द्वारा स्थापित गुप्त क्रांतिकारी संगठन से हुआ और उनके अन्दर देश को स्वतंत्र कराने की भावना बलवती हो गई। इतिहासकार भास्कर मजुमदार के अनुसार प्रफुल्ल चाकी राष्ट्रवादियों के दमन के लिए बंगाल सरकार के कार्लाइस सर्कुलर के विरोध में चलाए गए छात्र आंदोलन की उपज थे। पूर्वी बंगाल में छात्र आंदोलन में उनके योगदान को देखते हुए क्रांतिकारी बारीद्र घोष उन्हें कोलकाता ले आए जहाँ उनका सम्पर्क क्रांतिकारियों की युगांतर पार्टी से हुआ। उन्हें पहला महत्वपूर्ण काम अंग्रेज सेना अधिकारी सर जोसेफ बैंफलाइड फुलर को मारने का दिया गया पर यह योजना कुछ कारणों से सफल नहीं हुई।
क्रांतिकारियों को अपमानित करने और उन्हें दण्ड देने के लिए कुख्यात कोलकाता के चीफ प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड को जब क्रांतिकारियों ने जान से मार डालने का निर्णय लिया तो यह कार्य प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस को सौंपा गया। दोनों क्रांतिकारी इस उद्देश्य से मुजफ्फरपुर पहुंचे जहाँ ब्रिटिश सरकार ने किंग्सफोर्ड के प्रति जनता के आक्रोश को भाँप कर उसकी सरक्षा की दृष्टि से उसे सेशन जज बनाकर भेज दिया था। दोनों ने किंग्सफोर्ड की गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन किया एवं ३० अप्रैल १९०८ ई० को किंग्सफोर्ड पर उस समय बम फेंक दिया जब वह बग्घी पर सवार होकर यूरोपियन क्लब से बाहर निकल रहा था। लेकिन जिस बग्घी पर बम फेंका गया था उस पर किंग्सफोर्ड नहीं था बल्कि बग्घी पर दो यूरोपियन महिलाएँ सवार थीं। वे दोनों इस हमले में मारी गईं।
दोनों क्रन्तिकारी घटनास्थल से भाग निकले परन्तु मोकामा स्टेशन पर चाकी को पुलिस ने घेर लिया| उन्होंने अपनी रिवाल्वर से अपने ऊपर गोली चलाकर अपनी जान दे दी। यह घटना १ मई, १९०८ की है। बिहार के मोकामा स्टेशन के पास प्रफुल्ल चाकी की मौत के बाद पुलिस उपनिरीक्षक एनएन बनर्जी ने चाकी का सिर काट कर उसे सबूत के तौर पर मुजफ्फरपुर की अदालत में पेश किया। यह अंग्रेज शासन की जघन्यतम घटनाओं में शामिल है। चाकी का बलिदान जाने कितने ही युवकों का प्रेरणाश्रोत बना और उसी राह पर चलकर अनगिनत युवाओं ने मातृभूमि की बलिवेदी पर खुद को होम कर दिया| महान हुतात्मा को आज उनके जन्मदिवस पर कोटिशः नमन|
सन १८८८ में आज १० दिसम्बर के दिन जन्मे क्रांतिकारी प्रफुल्ल चाकी का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। प्रफुल्ल का ज...न्म उत्तरी बंगाल के बोगरा गाँव (अब बांग्लादेश में स्थित) में हुआ था। जब प्रफुल्ल दो वर्ष के थे तभी उनके पिता जी का निधन हो गया। उनकी माता ने अत्यंत कठिनाई से प्रफुल्ल का पालन पोषण किया। विद्यार्थी जीवन में ही प्रफुल्ल का परिचय स्वामी महेश्वरानंद द्वारा स्थापित गुप्त क्रांतिकारी संगठन से हुआ और उनके अन्दर देश को स्वतंत्र कराने की भावना बलवती हो गई। इतिहासकार भास्कर मजुमदार के अनुसार प्रफुल्ल चाकी राष्ट्रवादियों के दमन के लिए बंगाल सरकार के कार्लाइस सर्कुलर के विरोध में चलाए गए छात्र आंदोलन की उपज थे। पूर्वी बंगाल में छात्र आंदोलन में उनके योगदान को देखते हुए क्रांतिकारी बारीद्र घोष उन्हें कोलकाता ले आए जहाँ उनका सम्पर्क क्रांतिकारियों की युगांतर पार्टी से हुआ। उन्हें पहला महत्वपूर्ण काम अंग्रेज सेना अधिकारी सर जोसेफ बैंफलाइड फुलर को मारने का दिया गया पर यह योजना कुछ कारणों से सफल नहीं हुई। क्रांतिकारियों को अपमानित करने और उन्हें दण्ड देने के लिए कुख्यात कोलकाता के चीफ प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड को जब क्रांतिकारियों ने जान से मार डालने का निर्णय लिया तो यह कार्य प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस को सौंपा गया। दोनों क्रांतिकारी इस उद्देश्य से मुजफ्फरपुर पहुंचे जहाँ ब्रिटिश सरकार ने किंग्सफोर्ड के प्रति जनता के आक्रोश को भाँप कर उसकी सरक्षा की दृष्टि से उसे सेशन जज बनाकर भेज दिया था। दोनों ने किंग्सफोर्ड की गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन किया एवं ३० अप्रैल १९०८ ई० को किंग्सफोर्ड पर उस समय बम फेंक दिया जब वह बग्घी पर सवार होकर यूरोपियन क्लब से बाहर निकल रहा था। लेकिन जिस बग्घी पर बम फेंका गया था उस पर किंग्सफोर्ड नहीं था बल्कि बग्घी पर दो यूरोपियन महिलाएँ सवार थीं। वे दोनों इस हमले में मारी गईं। दोनों क्रन्तिकारी घटनास्थल से भाग निकले परन्तु मोकामा स्टेशन पर चाकी को पुलिस ने घेर लिया| उन्होंने अपनी रिवाल्वर से अपने ऊपर गोली चलाकर अपनी जान दे दी। यह घटना १ मई, १९०८ की है। बिहार के मोकामा स्टेशन के पास प्रफुल्ल चाकी की मौत के बाद पुलिस उपनिरीक्षक एनएन बनर्जी ने चाकी का सिर काट कर उसे सबूत के तौर पर मुजफ्फरपुर की अदालत में पेश किया। यह अंग्रेज शासन की जघन्यतम घटनाओं में शामिल है। चाकी का बलिदान जाने कितने ही युवकों का प्रेरणाश्रोत बना और उसी राह पर चलकर अनगिनत युवाओं ने मातृभूमि की बलिवेदी पर खुद को होम कर दिया| महान हुतात्मा को आज उनके जन्मदिवस पर कोटिशः नमन|